• Thursday, 22 October 2026
डेढ़ टन वजन, छह किलोमीटर की यात्रा और 16 कहारों के कंधे: शेखपुरा में अनोखी परंपरा के साथ शुरू हुआ प्रतिमा विसर्जन

डेढ़ टन वजन, छह किलोमीटर की यात्रा और 16 कहारों के कंधे: शेखपुरा में अनोखी परंपरा के साथ शुरू हुआ प्रतिमा विसर्जन

Vikas
डेढ़ टन वजन, छह किलोमीटर की यात्रा और 16 कहारों के कंधे: शेखपुरा में अनोखी परंपरा के साथ शुरू हुआ प्रतिमा विसर्जन
शेखपुरा
शेखपुरा में दशहरा संपन्न होने के बाद बुधवार से प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू हो गया है और इस बार विसर्जन में डेढ़ टन से अधिक वजन की प्रतिमाओं को 16 कहार द्वारा कंधों पर उठाकर घुमाने की पुरानी परंपरा मुख्य आकर्षण बनी हुई है। पूजा समिति के पुराने कार्यकर्ता ईश्वर महतो बताते हैं कि दशकों पहले परिवहन का कोई साधन नहीं होने के कारण यह परंपरा शुरू हुई थी और समय के साथ भले ही कुछ प्रतिमाएं ट्रैक्टर से उठने लगीं, लेकिन वर्णवाल समाज, माहुरी समाज तथा स्वर्णकार समाज की दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन में आज भी 16 कहार की यह परंपरा पूरी निष्ठा से निभाई जा रही है, जिसमें 16 लोग डेढ़ टन से अधिक वजन की प्रतिमाओं को अपने कंधे पर उठाकर समूचे शहर में छह किलोमीटर की शोभायात्रा में भ्रमण कराते हैं।
शहर के विभिन्न पूजा पंडालों में स्थापित माता दुर्गा के अलावे भारत माता, काली माता और नरसिंह भगवान की प्रतिमाओं का विसर्जन आज गुरुवार की रात तक पूरा हो जाएगा। शहर में विसर्जन, शोभा यात्रा तथा उसके रूट को लेकर चली आ रही दशकों पुरानी परंपरा के अनुसार यह कार्य तीन दिनों तक चलता है। दशहरा में स्थापित काली माता की तीन प्रतिमाओं का विसर्जन दसवीं तिथि मंगलवार की संध्या ही संपन्न हो गया था। उसके बाद मंगलवार की देर रात वर्णवाल समाज और माहुरी समाज की दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन शोभा यात्रा शुरू हुई, जो बुधवार की संध्या विसर्जन के साथ संपन्न हो गई।
इन दो प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद बाकी की दुर्गा माता, भारत माता, काली माता और नरसिंह भगवान की प्रतिमाओं का अपने स्थान से निकलना शुरू हुआ, जो गुरुवार को पूरे दिन शोभा यात्रा के बाद संध्या से उनका विसर्जन शुरू हो गया। शहर में एक ही सरोवर गिरिहिंडा के खीरी पोखर में सभी प्रतिमाओं का विसर्जन होता है। विसर्जन से पहले शहर में सभी प्रतिमाओं की लगभग आठ किमी शोभा यात्रा निकाली जाती है, जिसमें ढोल-बाजे के साथ पूजा समितियों से जुड़े लोगों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। अलग-अलग समाज की स्थापित दुर्गा प्रतिमाओं में समाज से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं ने भी शोभा यात्रा में हिस्सा लिया और चांदनी चौक पर पटेल पूजा समिति में महिलाओं ने सिंदूर खेला में भाग लिया।
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